BUDGET SESSION : राज्यसभा कल तक के लिए स्थगित, शाम 5 बजे से लोकसभा की कार्यवाही

राज्यसभा की कार्यवाही कल सुबह नौ बजे तक के लिए स्थगित हो गई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा गुरूवार को भी जारी रहेगी। शाम चार बजे से लोकसभा की कार्यवाही शुरू होगी। बता दें कि किसानों के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन गई है। किसानों के मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद में 15 घंटे का समय तय किया गया है। राज्यसभा में हंगामा कर रहे आम आदमी पार्टी के सदस्यों को सभापति वेंकैया नायडू ने निलंबित कर दिया है। सभापति ने सांसद संजय सिंह, सुशील गुप्ता और एनडी गुप्ता को मार्शल बुलाकर बाहर भेजा। तीनों सांसदों को पूरे दिन की कार्यवाही के लिए सदन से निष्कासित किया गया है।

– लोकसभा को शाम 5 बजे तक के स्‍थगित किया गया।

370 पर बोले गुलाम नबी आजाद

गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में कहा कि मैंने कभी पूर्व पीएम अटल बिहारी वायपेयी या किसी भी बीजेपी

नेता को नहीं सुना, जिसन कभी (अगस्त 5, 2019 से पहले) यह मांग की हो कि जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभाजित किया जाना चाहिए। केवल एक लेह जिले में यूटी की मांग थी, कारगिल में नहीं।

सस्पेंड होने से हमें फर्क नहीं पड़ता

राज्यसभा से निलंबित किए गए आप नेता संजय सिंह ने कहा कि किसान दुश्मन देश के नागरिक नहीं, आपने बॉर्डर पर ऐसे किले लगा दिए हैं जैसे चीन-पाकिस्तान का बॉर्डर तैयार किया हो। सदन में हम तीनों को एक दिन के लिए सस्पेंड किया गया है लेकिन इस सस्पेंड से हमें फर्क नहीं पड़ने वाला है, हम किसानों के हक में आवाज़ उठाते रहेंगे।

देश के लिए किसान और जवान जरूरी

राज्यसभा में कांग्रेस नेता गुलाम नबी ने कहा कि देश के लिए किसान और जवान जरूरी है। सरकार को चीन और कोरोना वायरस महामारी से लड़ना चाहिए, किसानों से नहीं।

किसानों को खत्म करना चाहिए आंदोलन

जींद में होनी वाली महापंचायत में किसानों को सही दिशा में विचार करना चाहिए। सरकार 3 कानूनों को डेढ़ साल तक अमल नहीं करेगी और इसमें जो भी सुधार करना होगा उसके लिए वो तैयार है, उन्हें पंचायत में इन सब पर चर्चा करना चाहिए और आंदोलन को खत्म करना चाहिए।

लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव

कांग्रेस सांसद जसबीर सिंह ने किसानों के मुद्दों पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया है। संसद में किसानों के मुद्दे पर लगभग 15 घंटे तक चर्चा होगी।

BUDGET LIVE : किसानों के लिए समर्पण… की बात सुनते ही… विपक्ष ने मचाया हंगामा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि सरकार की किसानों की आय दोगुना करने की ओर काम कर रही है. निर्मला सीतारमण की ओर से कहा गया कि यूपीए सरकार से करीब तीन गुना राशि मोदी सरकार ने किसानों के खातों में पहुंचाई है. वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार की ओर से हर सेक्टर में किसानों को मदद दी गई है, दाल, गेंहू, धान समेत अन्य फसलों की एमएसपी बढ़ाई गई.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि अब इंश्योरेंस क्षेत्र में 74 फीसदी तक FDI हो सकेगी, पहले यहां पर सिर्फ 49 फीसदी तक की ही इजाजत थी. इसके अलावा निवेशकों के लिए चार्टर बनाने का ऐलान किया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्टार्ट अप कंपनियों के लिए ऐलान किया. इसके तहत करीब एक फीसदी कंपनियों को बिना किसी रोक-टोक के शुरुआत में काम करने की मंजूरी दी जाएगी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि विनिवेश के लिए सरकार लगातार काम कर रही है, कई कंपनियों की प्रक्रिया इस साल पूरी हो जाएगी. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि इसी वर्ष LIC के आईपीओ को बाजार में लाया जाएगा.

EXCLUSIVE : कोरोना काल के बाद… देश का पहला आम बजट… कल होगा पेश… चर्चा, कैसा होगा

देश का आम बजट कल 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। बीता वित्तीय वर्ष कोरोना काल की भेंट चढ़ गया। जिन विषयों को लेकर प्रावधान किए गए, उस पर बंदिशें लग गई, तो देश की आर्थिक व्यवस्था कोरोना महामारी का भेंट चढ़ गया। सरकार के हिस्से का राजस्व लाॅक डाउन की वजह से बर्बाद हो गया। इसके बावजूद देश को पूरी मजबूती के साथ चलाने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

आज ’’मन की बात’’ में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात का जिक्र भी किया है कि बीता वर्ष कोरोना महामारी की वजह से शून्य परक बीता, लेकिन देश की जनता ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, जितनी सामध्र्यता का उदाहरण पेश किया वह पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया है। वहीं अब नए कलेंडर वर्ष में वैक्सीनेशन की शुरुआत हो चुकी है और देश की जनता पूरी शिद्दत के साथ अपनी बारी का इंतजार कर रही है, यह भी दुनिया के लिए बड़ा उदाहरण है, जिसकी तारीफ हो रही है।

सालभर के महामारी के इस दौर के बाद देश को सामान्य जनजीवन की ओर लेकर जाना भी आसान नहीं है, लेकिन कोशिशों से ही व्यवस्थाएं सुधरती है। पीएम मोदी ने कल पेश होने वाले बजट को लेकर कुछ संकेत दिए हैं। इसमें सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य और व्यवसायिक गतिविधियों में तेजी व सुधार है। कोरोना महामारी ने देश को सिखाया है कि वक्त पड़ने पर बचत कितना काम आता है, लिहाजा आत्मनिर्भरता भी कल पेश होने वाले बजट का प्रमुख हिस्सा होगा।

कोरोना महामारी की वजह से देश की आर्थिक व्यवस्था जिस तरह से चरमराई है, छोटे और मध्यम कारोबारियों को जितना नुकसान उठाना पड़ा है, बचत पूंजी लोगों की समाप्त हुई है, इस पर भी बजट में विशेष प्रावधान किया जा सकता है, ताकि लोग आर्थिक और मानसिक परेशानियों से उबर सकें। लिहाजा करारोपण को लेकर छूट की सीमा पर बात हो सकती है।

शिक्षा पर सरकार नया प्रावधान की हिमायती बन सकती है, क्योंकि पूरे सालभर स्कूल बंद रहे हैं, बच्चों के साथ उच्च शिक्षण संस्थान भी इस महामारी से प्रभावित हुए हैं और छात्र-छात्राओं का एक साल बर्बाद हो गया है। ऐसे में शिक्षा को नई दिशा दिए जाने, आसान बुनियादी शिक्षा देने जैसे विषयों पर भी सरकार बड़ा प्रावधान कर सकती है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर एक बड़ा विषय है। अब तक तकनीकी मामलों को लेकर भारत चीन, जापान, सहित दुनिया के अन्य देशों पर निर्भर था, लेकिन चीन ने जिस तरह का रवैया अख्तियार किया है, उसके बाद से भारत ने तय कर लिया है कि परनिर्भरता को समाप्त करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास शुरू हो चुके हैं। इस बजट में इस विषय को ध्यान में रखते हुए बड़ा प्रावधान किए जाने की पूरी उम्मीद है।

बजट सत्र आज से, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की बनाई रणनीति, हंगामे के आसार, संसदीय कार्यमंत्री ने की यह अपील

नई दिल्‍ली। संसद का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है। किसान आंदोलन और विपक्षी लामबंदी को देखते हुए इस सत्र का हंगामेदार होना तय माना जा रहा है। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक विपक्षी दलों ने तीन नए कृषि कानूनों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। बजट सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ होगी जबकि पहली फरवरी को बजट पेश किया जाएगा।

कृषि कानूनों पर दिखेगी सियासी सरगर्मी

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने बताया कि कुल 16 विपक्षी दलों ने दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन हिंसा की जांच कराने की भी मांग की है। यही नहीं कांग्रेस समेत 16 विपक्षी दलों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के प्रति एकजुटता प्रकट करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के बहिष्कार का फैसला किया है।

संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्षी दलों को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक उन्‍होंने कहा कि राष्ट्रपति दलगत राजनीति से ऊपर हैं। हम विपक्ष से अपील करते हैं कि वह संसद में राष्‍ट्रपति के संबोधन के बहिष्कार के फैसले पर पुनर्विचार करे।

ये दल हुए लामबंद

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 विपक्षी लामबंदी में कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, सपा, राजद, माकपा, भाकपा, आईयूएमएल, आरएसपी, पीडीपी, एमडीएमके, केरल कांग्रेस (एम) और एआईयूडीएफ शामिल हैं।

जीएसटी और कैश ट्रांसफर का मसला भी उठेगा

इस सत्र में जीएसटी, टैक्‍स में कमी करने, सीधा कैश ट्रांसफर का मसला भी छाए रहने की उम्‍मीद है। कांग्रेस ने गुरुवार को मांग की कि कोरोना संकट को देखते हुए सरकार जरूरतमंद लोगों को सीधा नकद हस्तांतरण की व्‍यवस्‍था शुरू करे और करों को कम करे।

बड़ी ख़बर: इस दिन पेश होगा आम बजट… जानिए कैसे अंतरिम बजट से होता है अलग

वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आम बजट एक फरवरी 2021 को पेश होगा। इस साल पेश होने वाला बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यकाल का तीसरा बजट होगा। इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं। एक फरवरी 2019 को पीयूष गोयल द्वारा अंतरिम बजट पेश किया गया था। इसके बाद पांच जुलाई 2019 को निर्मला सीतारमण ने अपना पहला आम बजट पेश किया था। एक फरवरी 2020 को उन्होंने अपना दूसरा बजट पेश किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आम बजट आखिर अंतरिम बजट से अलग कैसे है?

अंतरिम बजट हर साल पेश होने वाले पूर्ण बजट से काफी अलग होता है। अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट (Vote on Account) में थोड़ा सा नीतिगत अंतर होता है।

केवल कुछ महीने के लिए होता है अंतरिम पेश
अंतरिम बजट एक खास समय के लिए होता है। चुनावी साल में सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। यह बजट चुनावी वर्ष में नई सरकार के गठन तक खर्चों का इंतजाम करने की औपचारिकता होता है। अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के शुरुआती तीन से पांच महीने या फिर चुनाव संपन्न होने तक के लिए अंतरिम बजट पेश होता है। जो नई सरकार सत्ता में आती है, वो पूर्ण बजट पेश करती है। यह इसलिए पेश किया जाता है ताकि सरकार की तरफ से होने वाले खर्चों में किसी तरह की कोई कमी न आए।

अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट में अंतर
अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट में थोड़ा सा अंतर होता है। अगर सरकार कुछ महीनों के लिए खर्चा चलाने के लिए ससंद से मंजूरी मांगती है तो उसे वोट ऑन अकाउंट कहते हैं। वहीं अगर सरकार खर्च के अलावा कमाई का ब्यौरा भी पेश करती है, तो उसके अंतरिम बजट भी कहा जाता है।

नीतिगत फैसले लेने की बाध्यता नहीं
अंतरिम बजट में सरकार आम तौर पर कोई नीतिगत फैसला नहीं लेती है लेकिन इसके लिए किसी तरह की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। इतिहास में कई बार पूर्व सरकारों के वित्त मंत्रियों ने अंतरिम बजट में भी कई तरह के नीतिगत फैसले लिए हैं। हालांकि नई सरकार सत्ता में आने के बाद इनको बदल सकती है।

BUDGET-2021 : सीएम के साथ बजट चर्चा में आज… अकबर, डहरिया और प्रेमसाय… होंगे शामिल

रायपुर। छत्तीसगढ़ का आगामी बजट फरवरी के दूसरे हफ्ते में आने की संभावना है। इससे पहले बजट की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने मंत्रियों से उनके विभागीय कार्यों, मांग, अनुदान, क्रियान्वयन सहित तमाम पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि किसी तरह की खामी ना रह जाए।

आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चर्चा के लिए मंत्री प्रेमसाय सिंह, शिव डहरिया और मोहम्मद अकबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। इससे पहले शनिवार को महिला बाल विकास मंत्री अनिला भेडिया से सम्बंधित विभागों पर चर्चा कर तैयारियों की समीक्षा की। सीएम और मंत्री के बीच इस साल बच्चों के लिए अलग से बजट बनाए जाने को लेकर भी चर्चा हुई है। आंगनबाड़ी में रिक्त पद और भवनों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। वहीं समाज कल्याण विभाग से जुड़े लोगों के लिए काम किए जाने पर हुई।

मंत्री गुरु रुद्रकुमार के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग विभाग की बजट तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने इन दोनों विभागों से संबंधित प्रस्तावों पर गहन चर्चा करते हुए प्रदेश की जनता को स्वच्छ पेयजल और ग्राम उद्योग को रोजगार से जोड़ते हुए काम करने की बात कही है।

BREAKING : बजट समीक्षा का आगाज… सीएम बघेल ने ली क्रियान्वयन विभाग की बैठक… 21 जनवरी तक रहेगा जारी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, योजना, आर्थिक एवं सांख्यकीय, संस्कृति और बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग की बजट तैयारियों की समीक्षा की।

बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, प्रभारी मुख्य सचिव सुब्रत साहू, खाद्य विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, वित्त विभाग की सचिव श्रीमती अलरमेलमंगई डी., मार्कफेड के प्रबंध संचालक श्री अंकित आनंद, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक श्री निरंजन दास सहित सम्बंधित अधिकारी उपस्थित थे।

1 फरवरी को सुबह 11 बजे पेश होगा बजट, जानिए इस बार के बजट में क्या-क्या बदल गया

नई दिल्ली। 2021 1 फरवरी को पेश होगा। राष्ट्रपति शुक्रवार यानी 29 जनवरी को सुबह 11.00 बजे संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे। केंद्रीय बजट सोमवार सुबह 11:00 बजे पेश किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों से सरकार अलग से रेल बजट पेश नहीं कर रही है। अब रेल बजट भी आम बजट के साथ पेश किया जा रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनकी टीम के सामने इस बार का बजट पेश करना एक चुनौती भरा काम है, क्योंकि ऐसे समय में जब कोरोना काल चल रहा हो और इसने अर्थव्यवस्था को सुस्त कर दिया हो तो लोगों को ध्यान में रखते हुए एक बेहतरीन बजट पेश करना होगा। कोरोना महामारी की वजह से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की इकोनॉमी में 23.9 फीसद का जबरदस्त संकुचन दर्ज किया गया।

मालूम हो कि 26 नवंबर, 1947 के बाद पहली बार बजट प्रतियां नहीं छापी जाएंगी। नॉर्थ ब्लॉक में बजट दस्तावेजों के प्रिंटिंग के लिए प्रेस है, जहां 100 से अधिक ऐसे अधिकारी हैं जो बजट पर काम करते हैं और ये सभी वहां तब तक रहते हैं जब तक बजट दस्तावेजों को सील नहीं किया जाता और उन्हें जब तक भेजा न जाये, तब तक रहते हैं। लेकिन कोविड -19 को देखते हुए सरकार ने इस बार बजट प्रतियां नहीं छापने का फैसला किया है।

पहले ऐसी खबरें आईं थी कि इस बार पारंपरिक हलवा समारोह जो बजट की आधिकारिक छपाई से जुड़ा है वह भी नहीं होगा। हालांकि, वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि पारंपरिक हलवा समारोह संसद में बजट की प्रस्तुति से 10 दिन पहले परंपरा के अनुसार किया जाएगा।

ANI ने अपने ट्वीट में कहा, ‘वित्त मंत्रालय ने उन रिपोर्टों का खंडन किया है कि जिसमें कहा जा रहा था कि इस साल पारंपरिक हलवा समारोह नहीं किया जाएगा। संसद में बजट की प्रस्तुति से 10 दिन पहले परंपरा के साथ यह कार्यक्रम होगा।

BUDGET : बजट पर चर्चा आज से… सीएम बघेल विभागवार करेंगे समीक्षा… ली जाएगी जनता की राय

रायपुर। महाराष्ट्र प्रवास पर निकलने से पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट कर दिया था कि लौटते ही बजट सत्र को लेकर चर्चाएं होगी। पहले संबंधित विभाग के मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक होगी, उसके बाद आम जनता की राय को भी शामिल किया जाएगा। उस पर अमल करते हुए आज से मुख्यमंत्री विभागीय मंत्रियों के साथ समीक्षा शुरू करने वाले हैं। 21 जनवरी तक सभी 12 मंत्रियों के विभागों की समीक्षा होगी, पश्चात ही बजट तैयार किया जाएगा।

साल 2020-21 में शामिल बजट योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ ही आगामी बजट सत्र लागू किए जाने वाली योजनाओं पर चर्चा करेंगे। साथ ही नए वर्ष के लिए किन योजनाओं को लागू किया जाना आवश्यक है, इस पर भी जानकारी लेंगे। माना जा रहा है कि राज्य सरकार के बजट में इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित योजनाओं को स्थान मिल सकता है।

साथ ही कुछ नई योजनाएं भी शुरू की जा सकती हैं। राज्य सरकार का बजट लगभग एक लाख 10 हजार करोड़ का होगा। इस पर पहले से चल रही हितग्राही मूलक योजनाओं को एक बार फिर शामिल किया जाएगा। राज्य सरकार की प्राथमिकता में किसान, मजदूर और मध्यम वर्गीय परिवार पहले क्रम पर हैं। इसलिए यह माना जा रहा है कि इस बार सभी वर्गों के लिए बजट में प्रावधान किए जाएंगे।