इमरान के खिलाफ PAK में जबरदस्त असंतोष, ‘सैन्य कठपुतली’ से ज्यादा नहीं हैसियत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की असलियत पहले से ही सबके सामने है. इमरान खान और पाकिस्तान की पोल अब वहां के सांसद, विधायक और कई नेता भी खोल रहे हैं. खुल के इमरान को ‘सैन्य कठपुतली’ बताया जा रहा है. कई पाकिस्तानी नेताओं ने देश की बद्तर स्थिति, खराब कानून व्यवस्था, पड़ोसियों से खराब रिश्ते के लिए वहां सेना का हावी होना बताया है.

पश्तून नेता और पूर्व सीनेटर अफरासियाब खट्टक ने SAATH के पांचवें वार्षिक सम्मेलन में पाकिस्तान में अघोषित मार्शल लॉ लागू बताया. एक बयान के अनुसार, SAATH के पिछले वार्षिक सम्मेलन लंदन और वाशिंगटन में आयोजित किए जा चुके हैं, लेकिन इस वर्ष प्रतिभागियों की वर्चुअली मुलाकात हुई. इस दौरान तमाम वक्ताओं ने प्रधानमंत्री इमनरान खान को एक सैन्य कठपुतली बताया. SAATH लोकतंत्र समर्थक पाकिस्तानियों का एक समूह है जिसकी स्थापना पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी मोहम्मद ताकी ने की है.

SAATH के पांचवें वार्षिक सम्मेलन में राजनेता, पत्रकार, ब्लॉगर, सोशल मीडिया कार्यकर्ता और सिविल सोसाइटी के सदस्य शामिल रहे जिनमें से कई बाहर अन्य देशों में निर्वासन झेलने को मजबूर हैं. एक बयान में कहा गया कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले दिनों SAATH की बैठकों को बाधित करने की कोशिश की और पाकिस्तान में रहने वाले साथ के सदस्यों को विदेश यात्रा पर जाने से प्रतिबंधित कर दिया. लेकिन इस वर्ष, वर्चुअल मीटिंग हुई. खट्टक ने पाकिस्तान से सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह पाकिस्तान में सबसे खतरनाक मार्शल लॉ है क्योंकि इसने संवैधानिक संस्थानों को विकृत कर दिया है. मौजूदा सैन्य शासन राजनीतिक संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जो इस हद तक जा रहा है कि खुफिया एजेंसियां संसद के सदस्यों को सत्र में भाग लेने के लिए और वोट देने के लिए नहीं आने के लिए निर्देशित करती हैं.’

विश्व सिंधी कांग्रेस की रुबीना ग्रीनवुड, गिलगित-बाल्टिस्तान की ताहिरा जबीन, सेराकी आंदोलन के शहजाद इरफान, और पश्तून काउंसिल ऑफ अमेरिका के रसूल मोहम्मद सहित कई वक्ताओं ने जोर दिया कि पाकिस्तान में तमाम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है और उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में पश्तून महिला कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल, निर्वासित पत्रकार ताहा सिद्दीकी और ताहिर गोरा, और मानवाधिकारों के रक्षक मारवी सिरमद शामिल थे.

सीमा पर विवाद चीन और पाकिस्तान की साझा साजिश, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी गंभीर तनाव के पीछे चीन-पाकिस्तान की संयुक्त साजिश का इशारा किया है। रक्षा मंत्री ने कहा है कि चीन और पाकिस्तान एक मिशन के तहत भारत के साथ सीमा विवाद पैदा करने में जुटे हैं। उत्तरी सीमा पर पाकिस्तान की हरकत को लेकर हम पहले से वाकिफ हैं और अब पूर्वी सीमा पर चीन की ओर से एक मुहिम की तरह सीमा विवाद को जन्म दिया जा रहा है।
भारत इन चुनौतियों का मजबूती से करेगा मुकाबला
रक्षा मंत्री ने यह साफ संदेश भी दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इन चुनौतियों का मजबूती से सामना ही नहीं करेगा बल्कि बड़ा बदलाव भी लाएगा। ऐसे वक्त में जब भारत और चीन के बीच कमांडर स्तर की वार्ता चल रही है, शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की ओर यह बयान साफ संकेत है कि भारत इस बार कुछ तय कर मैदान में डटा है।

चीन को दिया कड़ा संदेश
पूर्व में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बिपिन रावत व सेना अध्यक्ष की ओर से तो दो मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी की बात की जाती रही है, लेकिन रक्षा मंत्री की ओर से आए बयान को बहुत अहम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री ने इस बयान के जरिये चीन को यह साफ संकेत तो दे ही दिया कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीनी अतिक्रमण से पैदा हुए तनाव और गतिरोध में भारत भी नरमी नहीं बरतेगा।

राज्यों को मिलेगा 12000 करोड़ का ब्याज मुक्त कर्ज, जानिए किस राज्य के हिस्से में कितनी आएगी राशि

नई दिल्ली। आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को 12,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध कराएगी। कर्ज 50 साल की अवधि का होगा और यह पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए दिया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को इस योजना की घोषणा की।

किस राज्य को कितना मिलेगा कर्ज?

उन्होंने कहा कि 12,000 करोड़ रुपये की राशि में से 1,600 करोड़ रुपये पूर्वोत्तर राज्यों को और 900 करोड़ रुपये उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 7,500 करोड़ रुपये की राशि शेष राज्यों को दी जाएगी। वहीं 2,000 करोड़ रुपये उन राज्यों को दिए जाएंगे जिन्होंने पहले बताए गए सुधारों को पूरा कर लिया होगा।
सीतारमण ने योजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पूरी राशि नई या मौजूदा पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च की जा सकेगी। सीतारमण ने कहा कि राज्य ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए बिलों का निपटान भी इससे कर सकते हैं, लेकिन पूरी राशि का भुगतान 31 मार्च 2021 से पहले करना होगा।

अतिरिक्त पूंजीगत व्यय की भी घोषणा

उन्होंने कहा कि यह कर्ज राज्यों की उधारी सीमा से अलग होगा। 50 साल बाद राज्यों को इसका भुगतान एक बार में करना होगा। वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त पूंजीगत व्यय की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त राशि सड़क, रक्षा ढांचे, जलापूर्ति और शहरी विकास पर खर्च की जाएगी। यह 4.13 लाख करोड़ रुपये के निर्धारित बजट के अतिरिक्त होगी।

ऋचा जोगी जाति प्रकरण मामला : अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, अमित जोगी बोले, असली नकली का फैसला मरवाही की जनता की असली अदालत में होगा… 

बिलासपुर। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी की बहू ऋचा जोगी ऋचा जोगी के जाति विवाद को सियासत गर्म हो गई है। अब छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के अध्यक्ष अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला ले लिया है। अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है।
समिति के नोटिस का ऋचा को आज जवाब देना था उधर कोरोना काल का हवाला देकर ऋचा ने समिति से जवाब प्रस्तुत करने की मोहलत मांगी है। मुख्य शिकायतकर्ता संतकुमार नेताम ने मामले में पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट लगाया है।
अमित जोगी ने कहा देश की न्याय व्यवस्था मुझे अटूट विश्वास है हर बार की तरह इस बार भी मुझे न्याय मिलेगा, कांग्रेस की सरकार चाहे जितने भी हथकंडे अपना ले, असली नकली का फैसला मरवाही की जनता की असली अदालत में होगा, अमित जोगी आदिवासी था, आदिवासी है, आदिवासी रहेगा और मरवाही से ही चुनाव लड़ेगा।
ऋचा जोगी ने सोमवार को हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अधिनियम 2013 के संशोधन और जिला समिति के नोटिस को चुनौती दी है। साथ ही कांग्रेस पर जाति प्रमाण पत्र रद्द करवा कर मरवाही उपचुनाव लड़ने देने से रोकने का आरोप भी लगाया है।
ससुर अजीत जोगी के निधन के कारण मरवाही सीट में उप चुनाव होने जा रहे है, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी विद्वेष की भावना से काम कर रही है। ऋचा जोगी ने आरोप लगाया है कि उनको चुनाव से लड़ने से रोकने की योजना के तहत जिला छानबीन समिति नोटिस जारी किया है।
उन्होंने समिति से 7 दिन का समय मांगा है, क्योंकि दस्तावेज पंजीयक कार्यालय में हैं। उसे लेने के लिए आवेदन किया है, पर स्टाफ के संक्रमित होने से ऑफिस बंद है। फिर भी ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस जाति प्रमाण पत्र रद्द कर चुनाव लड़ने से रोकना चाहती है।
ऋचा जोगी ने अपनी याचिका में बताया है कि उनके पूर्वज 1950 के पहले से ही मुंगेली के पास रहते आ रहे हैं। सारे दस्तावेज में वो गोंड जाति की हैं। उनके पति अमित जोगी और ससुर स्व. अजीत जोगी मरवाही से विधायक रहे हैं।
मीडिया से बातचीत में अमित जोगी ने कहा कि- ‘जब देश में कानून का राज्य, संविधान पर राज समाप्त हो जाए। ऐसे में लोगों के पास न्याय के मंदिर में जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता।
मेरी जाति का फैसला असली अदालत में होगा, भूपेश बघेल की नकली अदालत में नहीं। या तो मरवाही की जनता के सामने असली अदालत में होगा यानी माननीय न्यायालय में। मैं भूपेश बघेल की नकली अदालत का एक फैसला नहीं मानूंगा।’

ट्रांसफर ब्रेकिंग : 4 थाना प्रभारियों का हुआ तबादला, एसपी ने जारी किया आदेश, देखे सूची…

बिलासपुर जिले में चार थाना प्रभारियों का तबादला किया गया है। यह आदेश एसपी प्रशांत अग्रवाल ने जारी किया है।
आदेश के अनुसार, निरीक्षक सनिप रात्रे थाना प्रभारी सिविल लाइन, निरीक्षक जेपी गुप्ता थाना प्रभारी सरकंडा, निरीक्षक राजकुमार सोरी थाना प्रभारी सीपत व निरीक्षक रंजीत कंवर थाना प्रभारी अजाक बनाया गया है।

अब इस जिले में भी सुबह 8 से रात 8 बजे तक खुली रहेंगी सभी दुकानें… आदेश जारी…

गरियाबंद: कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी छतर सिंह डेहरे ने सम्पूर्ण गरियाबंद जिले के सभी दुकानों एवं व्यवसायिक संस्थानों को अब प्रातः 08 बजे से रात्रि 08 बजे तक खोलने संबंधी आदेश जारी किया है। ज्ञातव्य है कि पूर्व आदेश के अनुसार दुकानें शाम 06 बजे तक संचालित होता था जिसे शिथिल करते हुए रात्रि 08 बजे तक बढ़ाया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।

डोनाल्ड ट्रंप की पूजा करने वाले शख्स की हार्ट अटैक से मौत, कोरोना संक्रमित राष्ट्रपति की सेहत को लेकर चिंतित था

तेलंगाना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना संक्रमित होने के बाद से भूख हड़ताल पर जाने वाले तेलंगाना के किसान बुसा कृष्णा राजू की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई है।
ट्रंप (US President Donald Trump) के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद राजू पिछले कुछ दिनों से अनशन कर रहे थे, वह कई दिनों से सोए नहीं थे। वह ट्रम्प के ठीक होने के लिए लगातार प्रार्थना कर रहे थे। लेकिन इस प्रक्रिया में उनकी मृत्यु हो गई।
राजू ने पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रिय पति डोनाल्ड ट्रम्प की छह फुट की प्रतिमा बनाई थी। वह लगातार इस प्रतिमा की पूजा कर रहे थे । राजू (Farmers of Telangana Busa Krishna Raju) ने पिछले साल 14 जून को अपने जन्मदिन पर डोनाल्ड ट्रम्प की मूर्ति बनाई थी। राजू को पता था कि ट्रंप 24 फरवरी को भारत की दो दिवसीय यात्रा करेंगे। इसलिए वह बहुत खुश था। इतना ही नहीं, राजू हमेशा अपने साथ ट्रंप की फोटो लेकर जाता था।
उन्होंने आगे कहा, डोनाल्ड ट्रम्प के कोरोना परीक्षण के बाद राजू बहुत दुखी था। कई रात वह न सोता था और न ही खाता था। वह उसके ठीक होने की लगातार प्रार्थना कर रहा था। वह पिछले चार-पांच दिनों से यह सब कर रहा है। रविवार दोपहर को कार्डियक अरेस्ट से राजू की मौत हो गई। राजू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के डाई हार्ड फैन थे।

फोन और नोट से कोरोना संक्रमण की संभावना अधिक, इतने दिन जीवित रहता है वायरस

कोरोना वायरस (Coronavirus) का संक्रमण फिलहाल पीछा छोड़ता नहीं दिख रहा. तमाम एहतियातों के बावजूद संक्रमण का प्रसार थम नहीं रहा है. हर रोज कोरोना को लेकर नई-नई जानकारी सामने आ रही है. अब ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी (Australia national science agency) के अपने एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस 28 दिनों तक बैंकनोट्स और फोन जैसी वस्तुओं पर जीवित रह सकता है. इस अध्यन में यह भी पाया गया कि तापमान इस वायरस के जीवित रहने की अवधि को तय कर सकता है.

अध्ययन के दौरान पाया गया है कि 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर, SARS-CoV-2 चिकनी सतहों पर बेहद मजबूत था. ग्लास, मोबाइल फोन, स्टील और प्लास्टिक बैंकनोट्स पर 28 दिनों तक जीवित रहा. 30 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर वायरस के जीवित रहने की दर सात दिन तक नीचे आ गई. 40 डिग्री सेल्सियस पर यह 24 घंटे तक और गिर गई. इस अध्यन में पता चला कि तापमान में वृद्धि के साथ वायरस कमजोर हुआ.

अध्ययन में यह भी पता चला कि कपास और अन्य वस्तुओं पर वायरस छोटी अवधि के लिए जीवित रहा, सबसे कम तापमान पर 14 दिन तक और उच्चतम पर 16 घंटे तक. नए परिणामों से पता चलता है कि पिछले शोध से जो SARS-CoV-2 गैर-छिद्रपूर्ण सतहों पर चार दिनों तक जीवित रह सकता था की तुलना में अब वायरस काफी लंबे समय तक मौजूद रह सकता है.

ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर डिसीज प्रिपेयर्डनेस (Centre for Disease Preparedness) के निदेशक ट्रेवर ड्रू ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति मोबाइल, नोट आदि को छूने के मामले में लापरवाही बरतता है और फिर उन्हीं हाथों से नाक या आंख को छूता है तो उसके संक्रमित होने का जोखिम अधिक है.

VIDEO : युजवेंद्र चहल की मंगेतर धनाश्री वर्मा ने ऋतिक रोशन के गाने पर किया धांसू डांस

युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) की मंगेतर धनाश्री वर्मा इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. धनाश्री वर्मा एक डांसर और कोरियोग्राफर हैं. वहीं, इन दिनों उनके डांस वीडियो जमकर धूम मचा रहे हैं. हाल ही में धनाश्री ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में डांसर ऋतिक रोशन के गाने पर जबरदस्त डांस करती नजर आ रही हैं. इस वीडियो में धनाश्री ऋतिक के गाने ‘मैं तेरा’ पर धमाकेदार डांस कर रही हैं. उनके मूव्स फैन्स के होश उड़ा रहे हैं.
धनाश्री वर्मा के इस डांस वीडियो पर फैन्स खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. बता दें, एक्ट्रेस के डांस वीडियो अकसर वायरल होते रहते हैं. हाल ही में उनका एक और वीडियो वायरल हुआ था. इस वीडियो में धनाश्री ‘बम डिगी डिगी गाने पर धमाकेदार परफॉर्मेंस देती नजर आ रही थीं. धनाश्री का यह वीडियो भी फैन्स को काफी पसंद आया था.

https://www.instagram.com/reel/CGJreo1J6Oi/?igshid=1lo8m82bn383i

GOOD NEWS : नागपुर पुलिस के हाथों सुरक्षित, गुरप्रीत की सामने आई तस्वीर, ऐसी है अपहरण की दास्तां…

राजनांदगांव। जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में संचालित उड़ता पंजाब के संचालक बलजीत सिंह सेठिया के बेटे गुरप्रीत अपहरणकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की तत्परता की वजह से अपहरणकर्ताओं ने गुरप्रीत को किसी तरह का नुकसान भी नहीं पहुंचाया, वहीं ढ़ाबा संचालक का बेटा पूरी तरह सुरक्षित हाथों में है, इसकी पुष्टि के लिए नागपुर पुलिस ने फोटो भी भेज दिया है।
विदित है कि शनिवार रात उड़ता पंजाब ढ़ाबा से ही संचालक के बेटे का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया था। इस वारदात को अंजाम देने के महज आधे घंटे के भीतर ही 50 लाख की फिरौती के लिए फोन आ गया। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और तत्काल सीमाओं पर नाकेबंदी के साथ ही पड़ताल शुरू हो गई। वहीं जिन लोगों पर संदेह व्यक्त किया जा रहा था, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी हो चुकी थी।

बताया जा रहा है कि वारदात से पहले किडनेपरों ने ढ़ाबा में खाना खाया और पैक भी करवाया था। इसी दौरान ढ़ाबा संचालक के बेटे गुरप्रीत को बात करने के लिए तीन अज्ञात लोगों ने अपने पास बुलाया और बातों में फंसाकर उसे कार में जबरदस्ती बिठाकर मौके से फरार हो गए। तमाम घटना ढ़ाबा के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। महज आधे घंटे के भीतर फिरौती की रकम 50 लाख बताते हुए फोन किया गया, लेकिन यह काॅल बलजीत के बजाय उनकी पत्नी के नंबर पर आया।

GOOD NEWS : रेल यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा, चलती ट्रेन में ही दर्ज होगी शिकायतें, करना होगा ये….

अब रेल यात्रियों को यदि चलती ट्रेन में किसी भी तरह की परेशानी हुई तो वो तत्काल अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उनकी शिकायत पर चलती ट्रेन में ही अमल किया जाएगा। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए भोपाल जीआरपी ने ये सुविधा शुरु की है। भोपाल जीआरपी के अधिकारी ने सभी जीआरपी थाना प्रभारियों को निर्देश दिये गये हैं। मध्यप्रदेश जीआरपी में चलित ट्रेनों में एफआईआर लेने के लिये QIRT यानि Quick Investigation Response Team की व्यवस्था है। इसके लिए यात्री को GRP MP Help App डाउनलोड करना होगा। इस App के माध्यम से यात्री जैसे ही अपनी समस्या और शिकायत अपडेट करेंगे वैसे ही ये शिकायत जीआरपी म.प्र. राज्य स्तरीय कन्ट्रोल रूम में पहुंचेगी। इसके बाद तत्काल QIRT टीम यात्री की ट्रेन में बर्थ पर ही सम्पर्क कर सभी प्रकार की कार्रवाई पूरी करेगी।
15 एफआईआर अब तक हो चुकी है दर्ज
पुलिस अधीक्षक रेल हितेश चौधरी के निर्देश के बाद अब तक 15 एफआईआर जीआरपी इकाई भोपाल के थानों से बिना यात्री के परेशान किए ऑनलाइन ही दर्ज हो चुके हैं।

बड़ा सवाल FIR के बाद कितने निपटारे हुए ?
ट्रेनों ने एफआईआर दर्ज कर लेना अच्छी बात है. लेकिन बात तब बनेगी जब इस व्यवस्था का फायदा यात्रियों को मिलेगा। सिर्फ एफआईआर दर्ज कर लेने से जीआरपी की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है। उसके बाद कितनी शिकायतों पर कार्रवाई हुई और उनका निपटारा हुआ ये भी देखना होगा। नहीं तो ये सुविधा सिर्फ हाथी के दिखाने वाले दांत के सामान ही होगी। क्योंकि यात्रियों को यदि किसी भी स्टेशन में तकलीफ हुई तो तकलीफ सुनने के अलावा उसे दूर करना भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगा।

बड़ी खबर : पत्रकार से मारपीट मामले में राज्य सरकार की बड़ी कार्रवाई, TI की हुई छुट्टी, 3 सदस्यीय SIT को सौंपा गया जांच का जिम्मा…. 

रायपुर। पत्रकार कमल शुक्ला और सतीश यादव मारपीट मामले की जांच SIT करेगी। वहीं कांकेर के TI को भी पद से हटा दिया गया है। मारपीट मामले जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के कुछ घंटे बाद ही ये बड़ा एक्शन हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर बस्तर आईजी ने 3 सदस्यीय SIT गठित कर दी है।आपको बता दें कि आज शाम ही पत्रकारों की बनायी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंपी थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने बस्तर आईजी को इस पूरे प्रकरण पर कार्रवाई के निर्देश दिये थे।

ASP ओपी शर्मा इस पूरे प्रकरण की जांच करेंगे। जांच टीम में कांकेर के DSP आकाश मरकाम और सब इंस्पेक्टर राजेश राठौर भी शामिल किये गये हैं। आपको बता दें कि इस पूरे प्रकरण पर 26 सितंबर को ही कोतवाली कांकेर में धारा 294, 323, 506, 34 भादवि सहित अन्य धाराओं के तहत पहले ही मामला दर्ज किया जा चुका था।


उधर राज्य सरकार के निर्देश पर एसपी कांकेर ने कांकेर के थाना प्रभारी मोरध्वज देशमुख को हटा दिया है। उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया है। मोरध्वज के स्थान पर SI राजेश राठौर को कांकेर का नया थाना प्रभारी बनाया गया है। इससे पहले वो गोंडाहूर के थाना प्रभारी थे। वहीं निरीक्षक जवाहर गायकवाड को रक्षित केंद्र कांकेर से गोंडाहूर का नया थाना प्रभारी बनाया गया है।

लक्ष्मणपुर-बाथे : ऊंची जाति वाले कसते हैं तंज, 58 को मारा तो कुछ नहीं हुआ, एक-दो मर्डर से क्या होगा

बिहार में विधानसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं। सियासी दांव खेले जा रहे हैं। दावों और घोषणाओं के बीच सीटू तिवारी ने 1 दिसंबर, 1997 को रणवीर सेना द्वारा अंजाम दिए गए लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के पीड़ितों से बातचीत की। इस बातचीत में उनकी भयावह यादें हैं और इंसाफ के लिए तरसती आंखें भी

करीब 37 साल की दलित पुनिया देवी, अपने पति का मुंह देखे बिना ही बाल विधवा हो गई। साल 1997 में ही तो औरंगाबाद जिले के केरा गांव की इस बच्ची को ब्याहने लक्ष्मणपुर बाथे का एक लड़का शिवकैलाश चौधरी आया था। शादी के रस्म रिवाज हुए, लेकिन दुल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे का चेहरा नहीं देख पाए। पुनिया ने अपने पति का चेहरा उसकी मौत के बाद भी नहीं देखा।

पुनिया की सास दुखनी देवी सवाल करती है, “कैसे देखती ये? सोन (नदी) किनारे लाश पड़ी थी। मेरे मालिक (पति) चन्नारी चौधरी और मेरे दो बेटों गोरख और शिवकैलाश मछली पकड़ने गए थे, जहां उन्हें मार दिया गया। यह (पूनिया देवी) शिवकैलाश की घरवाली थी। इसका तो दोंगा (शादी के बाद का एक रस्म जिसमें लड़का अपने परिजनों के साथ जाकर लड़की को अपने घर लाता है) भी नहीं हुआ था।”

लेकिन पति की मौत की खबर सुनकर बुटाई चौधरी और मोखनी देवी की बेटी पुनिया, बगैर दोंगा के ससुराल आई। मृत्यु के बाद होने वाले संस्कार किए और एक साल अपने ससुराल रही। बाद में पुनिया की शादी, सास दुखनी देवी ने अपने ही बेटे ढेमन चौधरी से करा दी।

पुनिया कहती है, “ये उम्र में मुझसे छोटे हैं। बाकी प्यार करते हैं। तीन बच्चे हैं। ये मछली पकड़ते हैं और जब खेत में काम मिलता है तो खेत मजदूरी करते हैं।” हालांकि पुनिया को उस नरसंहार के बाद पति और परिवार तो मिल गया, लेकिन नौकरी नहीं मिली। वो बताती है, “मैं तो मृतक की विधवा थी। डीएम साहब के पास नौकरी के लिए गए तो उन्होंने कहा कि इसकी उम्र छोटी है और यह अनपढ़ है। जिसके बाद मैने तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन आज तक नौकरी नहीं मिली।”

लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार में मारे गए थे 58 दलित-पिछड़े

पुनिया देवी उस नरसंहार की एक पीड़ित है जो 1 दिसंबर 1997 को हुआ था। राज्य के इस सबसे बड़े नरसंहार में 58 दलितों की हत्या रणवीर सेना समर्थकों ने की थी। तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने इसे राष्ट्रीय शर्म की संज्ञा दी थी।
भोजपुर की तरफ से सोन नदी पारकरआए हत्यारों ने पहले तो उन मल्लाहों को मारा जो उनको अपनी नाव में लाए थे। फिर शिव वचन रविदास के घर से नरसंहार शुरू किया। 150 से ज्यादा की संख्या में आए हत्यारों के पास बंदूक के अलावा धारदार हथियार थे। इन लोगों ने दस गर्भवती महिलाओं के साथ साथ डेढ़ साल की बच्ची तक को अपनी नृशंसता का निशाना बनाया।
करीब 70 की उम्र पार कर चुके लक्ष्मण राजवंशी सबसे उम्रदराज चश्मदीद हैं, जो बात कर पाने की स्थिति में है। वो बताते है, “रात के सवा आठ बजे थे और एकदम से चीख पुकार मची। गोलियों की लगातार आवाज आ रही थी। बीच बीच मे रणबीर बाबा की जय का नारा लगता था। मैंने किसी तरह भाग कर जान बचाई। तकरीबन दो घंटे बाद जब बाहर आए तो देखा कि पूरे गांव में जगह-जगह लाश पड़ी थी। कोई मच्छरदानी में सोए रह गया तो किसी की लाश दीवार के सहारे खड़ी मिली। पुलिस दूसरे दिन सुबह 10 बजे पहुंची। तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी आईं, लाश को जलाने के लिए दो ट्रैक्टर लकड़ी मंगाया गया। ट्रैक्टर पर ही लाशों को लादा गया और अंतिम संस्कार किया गया।”
बाद में सभी मृतकों के आश्रितों को दो लाख रूपए का मुआवजा और सरकारी नौकरी मिली। सरकारी नौकरी ज्यादातर परिवारों को मिल गई लेकिन कई को अब भी अपने हिस्से की नौकरी मिलने का इंतजार है। लक्ष्मण राजवंशी इस नरंसहार के मुख्य गवाह भी थे। वो बताते है, “दारोगाजी हमें खुद पटना ले गए थे जज के सामने। उन्होने हमें अपने घर में रखा था, क्योंकि मेरी जान को खतरा था। गवाही के लिए भी ले गए तो अपना मोटरसाइकिल पर वे आगे बैठे, हमको बीच में बिठाया और हमारे पीछे थाने की मुंशी बैठे।”

जब 58 को मारा तो कुछ नहीं हुआ, अब एक दो मर्डर पर क्या होगा?

तब के जहानाबाद (अब अरवल) जिले में हुए इस नरसंहार में 7 अप्रैल 2010 को 16 दोषियों को फांसी और 10 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। लेकिन पटना हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर, 2013 को साक्ष्यों के अभाव में सभी दोषियों को बरी कर दिया। फिलहाल यह मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
गांव वाले बताते है कि आज भी उच्च जाति के लोग उन्हे धमकी देते हैं। 23 साल बीत जाने के बाद भी किसी को सजा न मिलने के चलते उनके हौसले बढ़े हुए है। लक्ष्मण चौधरी बताते है, “जब-तब कोई ऊंची जाति वाला आकर कह जाता है कि जब 58 की हत्या पर किसी का कुछ नहीं हुआ, तो अब एक-दो मर्डर करने पर कौन पूछेगा? कभी-कभी मन बहुत निराश होता है लेकिन फिर लगता है कि हमलोगों को न्याय जरूर मिलेगा।”

औरतों को यकीन था, हमलावर उन्हें नहीं मारेंगें

लक्ष्मणपुर बाथे में मारे गए 58 लोगों में से 32 महिलाएं थीं। इनमें बच्चियां भी थीं। जैसे कि सुमिता कुमारी (1.5 साल), सुनीता कुमारी (10 साल), चांदी कुमारी (10 साल), कबूतरी कुमारी (12 साल), सीता कुमारी (15 साल), 16 साल की शीला कुमारी भी थी।
सिकंदर चौधरी के परिवार में 9 लोगों की हत्या हुई थी, जिसमें उनकी पत्नी और दो बच्चियों भी थी।सिकंदर चौधरी ने अपनी जान टाड़ (सामान रखने के लिए कमरे के अंदर बनाई गई चौड़ी अलमारी) में जलावन के पीछे छिप कर बचाई थी।
मैने उनसे पूछा कि आपने अपनी पत्नी और बच्चियों को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की, तो उन्होने जवाब दिया, “हम तो बचाना चाहते थे, लेकिन मेरी मां ने कहा कि ये लोग औरत-बच्चे को मारकर क्या करेंगें? तुम जाकर छिप जाओ, हम लोगों को ये लोग कुछ नहीं करेंगें। मैं छिप गया, लेकिन मेरा माटी का घर खून से सन गया था।”
लक्ष्मण राजवंशी के घर की पत्नी जमुरत देवी, बहु मानती देवी, बेटी प्रभा देवी भी इस नरसंहार में मारी गई थी। वो बताते है कि सोन की तरफ से जब हत्यारों के आने का शोर हुआ तो वो अपने घर की दीवार फांद कर भागे।

वे बताते हैं, “हम लोग खाना खा कर पड़े थे। मेरी बेटी का दाेंगा एक हफ्ते बाद होने वाला था, इसलिए घर में उसकी विदाई के साथ जाने वाला सामान भी रखा था। जब शोर मचा तो मेरी पत्नी ने मुझे भगा दिया और कहा कि औरतों को ये लोग कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। लेकिन हत्यारों ने घर में मौजूद तीनों औरतों को बेरहमी से मार दिया। आज भी उनकी खून से सनी लाशें मुझे रात के अंधेरे में दिखती है।”

नरसंहार के पीड़ित लोग एक बच्ची के साथ दुष्कर्म का भी जिक्र करते है। हालांकि फारवर्ड प्रेस जब उस परिवार से मिला तो उन्होंने ऐसी किसी घटना से इंकार कर दिया।

नाबालिग बहुओं ने संभाला घर

इस नरसंहार के बाद ज्यादातर घरों में चूल्हा जलाने वाला भी कोई नहीं बचा था। सुनैना देवी के घर में सात लोगों की हत्या हुई थी। उसके घर में सिर्फ उसके पति विनोद पासवान और ससुर रामचेला पासवान बच गए। मैं जब उनसे मिली तब सुनैना देवी टोकरी बना रही थीं। सूखी घास और नीली चटक पन्नी के सहारे बन रही ये टोकरी जितनी सुंदर थी, सुनैना की जुबान से निकले शब्द उतने ही भयावह।

नरसंहार के समय सुनैना की उम्र महज 15 साल थी और वो अपने मायके में थी। सुनैना बताती है, “कांड की खबर सुनकर हम ससुराल आए लेकिन यहां तो सिर्फ लाशों की बू आती थी। पूरा घर काटने को दौड़ता था और सिर्फ गांव में रोने की आवाज सुनते थे। ऐसा लगता था कि जानवर भी डरे हुए और दुखी हैं। मेरे मां-बाप किस्मत का रोना रोते थे कि बेटी की शादी किस गांव में कर दी। हर दस-पन्द्रह दिन पर वे हालचाल लेने आते थे। इस घर में सिर्फ हम ही औरत बच गए थे।”

सुनैना के पति विनोद पासवान को बाद में सरकारी नौकरी मिली और फिलहाल दोनों के सात बच्चे हैं। सुनैना और विनोद पासवान के घर पर ही बाथे नरसंहार में मारे गए लोगों की याद में शहीद स्मारक बना है।

कई घरों में लटका ताला

शिव वचन रविदास जिनके घर से ये नरसंहार शुरू हुआ, वो बंद पड़ा है। वहीं कौशल्या देवी का भी घर बंद पड़ा है। उनके पति नरेश चौधरी और देवर रामनिवास चौधरी की सोन नदी के किनारे ही रणबीर सेना के लोगों ने हत्या कर दी थी। गांव में मौजूद उनकी रिश्तेदार मीना देवी बताती है, “कौशल्या देवी को नौकरी मिल गई थी स्वास्थ्य विभाग में तो वह अरवल जाकर ही रहने लगी। अब वहीं उन्होने घर बना लिया है और यहां कभी-कभार ही अपने घर आती है।”

बच्चे जो बच गए

रमेश कुमार महतो की उम्र बाथे नरसंहार की ‘उम्र’ से महज 6 महीना बड़ी है। वो 6 महीने के थे जब उनके पिता रामपुलिस महतो, मां बसंती देवी और फुआ तरेगनी देवी को मार डाला गया था। रमेश इसलिए बच गए क्योंकि वो रजाई के अंदर लपेटे रह गए।

रमेश के पास अपने माता-पिता की कोई याद नहीं है। उसको उसके दादा-दादी ने मजदूरी करके पाला है। बीएससी कर रहे रमेश बताते हैं, “सब लोग कहते हैं कि यह तय था कि बालिग होने पर नौकरी मिलेगी। लेकिन आजतक नहीं मिली। मुआवजे का पैसा अब खत्म होने वाला है। तो सरकारी नौकरी का इंतजार किए बिना ही हमने दिल्ली में प्राइवेट नौकरी शुरू कर दी।”

मामला सुप्रीम कोर्ट में

भाकपा (माले) लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्षरत रही है। गांव में भी शहीद स्मारक भाकपा (माले) ने बनवाया। पटना हाई कोर्ट ने जब साल 2013 में सभी दोषियों को बरी कर दिया तो पार्टी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की।

भाकपा माले की पोलित ब्यूरो की सदस्य कविता कृष्णन बताती हैं, “आज तक इस मामले में कोई तारीख नहीं पड़ी। बथानी टोला मामले में तारीख मिली थी, तो उसमें दो जज की बेंच के चलते सुनवाई नहीं हुई। मुझे लगातार पीडित फोन करते रहते हैं, लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं है। बाकी हमें नीतीश सरकार से न्याय की उम्मीद नहीं रही। इसी सरकार ने हत्यारों के राजनीतिक संरक्षण को लेकर बने जस्टिस अमीरदास आयोग को भंग कर दिया था।”

महतो, राजवंशी, पासवान, मल्लाह, रविदास जाति से आने वाले नरसंहार पीड़ितों के कच्चे घर अब पक्के हो गए है। राबड़ी देवी सरकार ने ज्यादातर को सरकारी नौकरी भी दे दी थी, लेकिन आर्थिक तौर पर थोड़ा बेहतर हुए इन परिवारों को न्याय का इंतजार है। इन पीड़ितों की आंखें हर बाहरी आदमी से सवाल करती है – आदमी ने आदमी को काट दिया, और तुमलोगों मे हमें न्याय के लिए भी तरसा दिया!

बिल्हा थाना के घूसखोर पुलिस कर्मी को ग्रामीण की शिकायत पर एसपी ने किया निलंबित…

बिलासपुर। संजय मिश्रा

घूसखोरी की हदें पार कर चुके पुलिसकर्मी को पुलिस अधीक्षक नें ग्रामीण की शिकायत पर निलंबित कर दिया है, जो पूर्व में चकरभाटा थाना में पदस्थ था जो चकरभाठा के मछली दुकान, मुर्गी दुकान, मेडिकल दुकान, लोहा दुकान एवं अन्य जगहों से अवैध वसूली करके व्यापारियों के नाक में दम कर कर रखा था, और यही हाल बिल्हा थाना में पदस्थ होनें के बाद भी यही काम करता था, थाना में समस्या ले कर आनें वाले ग्रामीणों को गुमराह कर मोटे रकम वसूला करता था

जिसकी शिकायत पत्थर खान के ग्रामीण नें पुलिस के आला अधिकारियों से की एवं जांच कर सबूत के साथ पुलिस कर्मी संतोष यादव को सस्पेंड कर लाइन अटैच किया गया, क्योंकि हवलदार साहब स्थानीय नेताओं से अच्छी पकड़ बनाए हुए है, एवं इनके भाई व परिवार के लोग पुलिस विभाग में है तो ये महाशय बिना खौफ के धड़ल्ले से अवैध गतिविधियों को अंजाम देते थे।

छत्तीसगढ़ सरकार का पत्रकारों के हित में एक और बड़ा फैसला, सम्मान निधि को 5 हजार से बढ़ाकर किया 10 हजार रूपए…

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार पत्रकारों के लिए लगातार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। जनसंपर्क विभाग द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की पात्रता एवं प्रावधानों में संशोधन कर ज्यादा से ज्यादा पत्रकारों को इनके दायरे में लाया जा रहा है। प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए पिछले वर्ष ही वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि को पांच हजार रूपए से बढ़ाकर दस हजार रूपए प्रति माह किया है। अधिमान्यता नियमों में संशोधन कर विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। पत्रकार कल्याण कोष से जरूरतमंद पत्रकारों को आर्थिक सहायता की सीमा को 50 हजार रूपए से बढ़ाकर दो लाख रूपए किया गया है। राज्य शासन के श्रम विभाग ने पत्रकारों के हित में उनकी सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का आदेश जारी किया है।
प्रदेश में कार्यरत पत्रकारों को श्रमजीवी पत्रकार के रूप में पहचान देने एवं उनके काम में सहूलियत के लिए साल भर पहले नए अधिमान्यता नियम लागू किए गए हैं। मीडिया के बदलते स्वरूप को देखते हुए टी.वी. चैनलों, वेब-पोर्टल, समाचार पत्रिका और समाचार एजेंसी के पत्रकारों को भी अधिमान्यता देने का प्रावधान किया गया है। मीडिया संस्थानों के लिए अधिमान्यता कोटा करीब-करीब दुगुना कर दिया गया है। नए नियमों के तहत राज्य में पहली बार विकासखंड स्तर के पत्रकारों के लिए भी अधिमान्यता का प्रावधान किया गया है। साथ ही लंबे समय तक इस पेशे में रहे सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए दीर्घकालिक सेवा पत्रकार अधिमान्यता भी शुरू किया गया है। नए अधिमान्यता नियमों के फलस्वरूप वर्तमान में 233 राज्य स्तरीय और 287 जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार हैं।
पत्रकारों को गंभीर बीमारी के इलाज, वृद्धावस्था में आर्थिक संकट, दैवीय विपत्ति जैसी परिस्थितियों में मदद का दायरा बढ़ाने के लिए पत्रकार कल्याण कोष के नियमों में पिछले वर्ष व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब आर्थिक सहायता की सीमा 50 हजार रूपए से बढ़ाकर दो लाख रूपए कर दी गई है। साथ ही दंगों, बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों में समाचार कवरेज के दौरान कैमरा एवं अन्य उपकरणों के नुकसान पर भी आर्थिक मदद का प्रावधान नए नियम में जोड़ा गया है। पिछले दो वर्षों में प्रदेश के 49 पत्रकारों को साढ़े 41 लाख रूपए से अधिक की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है।
वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि की राशि दुगुनी करने के साथ ही इसके दायरे में अधिक से अधिक पत्रकारों को लाने के लिए पात्रता की शर्तें शिथिल की गई हैं। योजना के तहत पहले जहां हर माह पांच हजार रूपए दिए जाते थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर दस हजार रूपए कर दिया गया है। पात्रता के लिए आयु सीमा भी 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष की गई है। पहले इस योजना में शामिल पत्रकारों की पात्रता की हर पांच वर्ष में समीक्षा की जाती थी। नए नियमों के तहत समीक्षा का प्रावधान समाप्त करते हुए अब इसे आजीवन कर दिया गया है। योजना में शामिल पत्रकारों को अक्टूबर-2019 से हर महीने दस हजार रूपए की सम्मान निधि दी जा रही है। वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि योजना के फलस्वरूप दो वर्ष पूर्व जहां आठ वरिष्ठ पत्रकारों को योजना का लाभ मिल रहा था, अब यह संख्या 23 हो गई है।

मुख्यमंत्री को कांकेर घटना के संबंध में पत्रकारों के जांच दल द्वारा रिपार्ट प्रस्तुत…

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में कांकेर पत्रकारों के साथ हुई घटना से संबंधित तथ्यों के अन्वेषण हेतु राज्य शासन द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय जांच दल ने मुलाकात कर उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
मुख्यमंत्री ने बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक को जांच रिपोर्ट भेजते हुए इसका परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर पत्रकारों की उच्च स्तरीय जांच दल के अध्यक्ष राजेश जोशी, संपादक नवभारत रायपुर के साथ ही जांच दल के सदस्य अनिल द्विवेदी, सम्पादक आज की जनधारा रायपुर, सुरेश महापात्र सम्पादक बस्तर इम्पेक्ट दंतेवाड़ा, शगुफ्ता शीरीन सहायक संपादक, राष्ट्रीय हिन्दी मेल और रूपेश गुप्ता संवाददाता स्वराज्य एक्सप्रेस रायपुर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में 16 पेज का मूल प्रतिवेदन तथा 450 पेज के अन्य दस्तावेज शामिल है।

बड़ी खबर : महिला सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने जारी की एडवायजरी, एफआईआर नहीं हुआ दर्ज तो अधिकारियों पर गिरेगी गाज… पढ़िए पूरी खबर

नयी दिल्ली। हाथरस मामले के बाद से देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवालिया निशान उठ रहे हैं. इस बीच केंद्र सरकार भी मामले को लेकर हरकत में आ गई है. देश में तेजी से बढ़ते महिला अपराध को देखते हुए गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी की है. दरअसल रेप जैसे गंभीर मामलों में भी पीड़ित के एफआईआर के लिए थानों के चक्कर काटने के मामलों को केंद्र ने गंभीरता से लिया है.

केंद्र ने जारी की एडवायजरी –

केंद्र सरकार ने एक एडवायजरी जारी की है. इसके मुताबिक अब महिला अपराध पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा. गृह मंत्रालय ने आईपीसी और सीआरपीसी के प्रावधान गिनाते हुए कहा कि राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेश इनका पालन सुनिश्चित करने को कहा है. गृह मंत्रालय की ओर से साफ किया गया है कि एडवाइजरी में जारी बातों पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गृहमंत्रालय की एडवाइजरी में क्या है खास –
– संज्ञेय अपराध की स्थिति में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है. सरकार ने याद दिलाया है कि कानून में भी जीरो एफआईआर का प्रावधान है. जीरो एफआईआर तब दर्ज की जाती है, जब अपराध थाने की सीमा से बाहर हुआ हो. IPC की धारा 166 A(c) के तहत अगर एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है तो अधिकारी को सजा का भी प्राधान है.
– सीआरपीसी की धारा 173 में दुष्कर्म से जुड़े किसी भी मामले की जांच दो महीने के अंदर पूरी करने का प्रावधान है. अपराध में जांच की प्रगति जानने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से ऑनलाइन पोर्टल बनाया है.
– सीआरपीसी के सेक्‍शन 164-A के अनुसार दुष्कर्म के किसी भी मामले की सूचना मिलने के 24 घंटे के अंदर पीड़िता की सहमति से एक रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल जांच करेगा.

बड़ी ख़बर : इंडियन रेलवे में बड़ा बदलाव… यात्रा से पहले जाने क्या है नियम ?

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने टिकटों के आरक्षण के नियमों में आज यानी 10 अक्टूबर से बड़ा बदलाव किया है। नए बदलाव के तहत अब ट्रेनों में टिकट आरक्षण का दूसरा चार्ट (Reservation Chart) ट्रेन के स्टेशन से चलने के आधे घंटे पहले जारी किया जाएगा। बता दें कि पिछले कुछ महीने से कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए रेलवे ने यह समय दो घंटे कर दिया था।
ट्रैन चलने से आधे घंटे पहले रिजर्वेशन करने की सुविधा
अब ट्रेन चलने से आधे घंटे पहले तक रिजर्वेशन कराने की सुविधा भी म‍िलेगी। यह सुविधा करंट बुकिंग काउंटर और आनलाइन दोनों पर उपलब्ध रहेगी। अनलॉक शुरू होने के बाद रेल प्रशासन ने कुछ ट्रेनों को चलाना शुरू कर द‍िया है। धीरे-धीरे ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। स्पेशल ट्रेन के लिए प्रथम चार्ट ट्रेन चलने के चार घंटे पहले बनाई जाती है। चार घंटे पहले तक बुकिंग काउंटर से टिकट लिया जा सकता है और वापस किया जाता है। प्रथम चार्ट बनने के बाद जो बर्थ खाली रह जाती है, ट्रेन चलने के दो घंटे पहले तक यात्री उस पर आनलाइन रिजर्वेशन टिकट ले सकते हैं। वर्तमान व्यवस्था में कई स्पेशल ट्रेन में बर्थ खाली होती है, अंतिम समय में यात्री रिजर्वेशन टिकट नहीं ले पाते हैंं।
ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों सुविधा ले सकते हैं
रेल प्रशासन 10 अक्‍टूबर यानी आज से व्यवस्था बदल दिया है। ट्रेन चलने से पहले प्रथम आरक्षण चार्ट चार घंटे पहले बनाया जाएगा। दूसरा चार्ट ट्रेन चलने से आधे घंटे पहले तक बनेगा। यात्री खाली बर्थ पर रिजर्वेशन करा सकते हैं और टिकट भी वापस करा सकते हैं। जिस स्टेशन पर करंट बुकिंग काउंटर है, यात्री वहां से टिकट खरीद सकते हैं। ई टिकट ले सकते हैं। यानी यात्री ट्रेन पकड़ने के ल‍िए घर से निकले के बाद मोबाइल से ई आरक्षण टिकट ले सकते हैं। रेलवे की इस सुविधा से ऐसे लोगों को विशेष मदद मिलेगी जिन्‍हें किसी विशेष आपात स्थितियों में ट्रेन से यात्रा करना पड़ती है।
बता दें कि भारतीय रेलवे ने 25 मार्च से राष्ट्रीय लॉकडाउन के चलते सभी यात्री ट्रेन सेवाएं निलंबित कर दी थी। हालांकि, उसने चरणबद्ध तरीके से अपनी सेवाएं बहाल की, जिसकी शुरुआत एक मई से प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल शुरू करने से हुई।
त्योहारी सीजन में रेलवे चलाएगा 200 ट्रेनें
त्योहारी मौसम में कितनी ट्रेनें चलाई जाएंगी इसे लेकर मीडिया में तमाम अटकलें लगाई जा रही थीं, जिसे कुछ दिन पहले ही रेलवे ने साफ कर दिया। कहीं से ये खबर आ रही थी कि 100 ट्रेनें चलेंगे तो कहीं से 50 ट्रेनें चलाने की खबर आ रही थी। रेल बोर्ड के चेयरमैन ने साफ कर चुके हैं कि त्योहारी मौसम में अक्टूबर से नवंबर के बीच 200 से भी अधिक ट्रेनें चलाई जाएंगी और जरूरत पड़ी तो इनकी संख्या और भी बढ़ाई जा सकती है।

दो बीवियों ने किया शौहर का बंटवारा, पहली पत्नी के हिस्से में आया एक रात और एक दिन

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दो बीवियों के बीच पति के अनोखे बंटवारे का मामला सामने आया है। दिल्ली में रहकर कारोबार करने वाला नौशाद अली पहली बीवी के सातों बच्चों को प्रति दिन 300 रुपए की दर से भुगतान करेगा। दिल्ली से जब वह वापस मुरादाबाद लौटेगा तो वह पहले पहली बीवी के घर जाएगा। पहली बीवी के साथ एक दिन व एक रात गुजारने के बाद दूसरे दिन दूसरी बीवी के पास जाएगा। पहली बीवी नौशाद को बिना जानकारी दिए कहीं नहीं जाएगी। हालांकि, दोनों बीवियां आपसी सहमति के आधार पर एक-दूसरे के घर आ-जा सकती हैं। नारी उत्थान केंद्र में काउंसलर ने दोनों पक्षों से बातचीत की, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।जानकारी के मुताबिक, मुरादाबाद के मुगलपुरा थाना क्षेत्र के रहने वाले नौशाद अली दिल्ली में रहक कारोबार करते हैं।
नौशाद की पहली पत्नी मुमताज हैं, जिससे उनके सात बच्चे हैं। इसके बावजूद नौशाद ने रूही नाम की एक महिला से भी शादी कर ली। रूही से नौशाद अली के एक बच्चे की मां है। मुमताज को जब इस बात की जानकारी हुई तो घर में बवाल मच गया। मुमताज और नौशाद के बीच रोज झगड़ा और हंमागा होने लगा। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस तक बात पहुंच गई। एसएसपी ने मामले को नारी उत्थान केंद्र के सुपुर्द कर दिया। गुरुवार को नौशाद अली व उसकी दोनों पत्नियों को नारी उत्थान केंद्र बुलाया गया, जहां काउंसलर ने दोनाें पक्षों से बातचीत की।नारी उत्थान केंद्र में ये तय हुआ कि नौशाद अली पहली बीवी के सातों बच्चों को प्रति दिन 300 रुपए की दर से भुगतान करेगा। दिल्ली से जब वह वापस मुरादाबाद लौटेगा तो वह पहले पहली बीवी के घर जाएगा।
पहली बीवी के साथ एक दिन व एक रात गुजारने के बाद दूसरे दिन दूसरी बीवी के पास जाएगा। इस बात पर सहमति होने के बाद तीनों एक साथ घर चले गए। बता दें, पहली बीवी के बच्चों के कपड़े खरीदने की जिम्मेदारी भी नौशाद अली पर ही है।बता दें, इससे पहले जनवरी 2020 में झारखंड की राजधानी रांची से कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था। दो पत्नी ने अपने पति का आपस में बंटवारा कर लिया था। ये तय हुआ था कि सप्ताह में 3-3 दिन साथ रहा जाए। दोनों ने पति को एक दिन की छुट्टी भी दी, लेकिन दूसरी पत्नी थाने पहुंची और पति पर कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने का आरोप लगाया। उसने पुलिस को बताया कि पांच दिन से उनके पति घर नहीं आए। वह अपनी पहली पत्नी के साथ रहने लगे। पुलिस ने पति को थाने बुलाया और समझाया। इसके बाद पति दूसरी पत्नी को साथ लेकर चला गया।

बड़ी खबर : राज्य स्थापना दिवस-2020 ‘राज्य अलंकरण समारोह‘ का होगा वर्चुअल आयोजन

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस एक नवम्बर 2020 के अवसर पर ‘राज्य अलंकरण समारोह‘ का वर्चुअल आयोजन किया जाएगा। मुख्य सचिव आर.पी. मंडल ने सभी संबंधित विभागों को राज्य सम्मान के लिए प्रविष्ठियां, विज्ञापन तथा सम्मान आदि की समस्त कार्यवाही निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव द्वारा राज्य सम्मान के लिए तय की गई समय-सीमा के अनुसार सम्मान ग्रहिता व्यक्ति अथवा संस्था का नाम, परिचय एवं प्रशस्ति के लिए 13 अक्टूबर तक विज्ञापन देना और 18 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करने के लिए तिथि निर्धारित की गई है। इसी तरह 20 अक्टूबर तक जूरी की बैठक और 25 अक्टूबर तक समन्वय में अनुमोदन प्राप्त करने की तिथि निर्धारित की गई है। मुख्य सचिव मंडल ने संबंधित विभाग के द्वारा दिए जाने वाले सम्मान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्ति के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि विभाग द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी तथा सम्मान संबंधी जानकारी राज्य नोडल अधिकारी संचालक संस्कृति एवं पुरातत्व महंत घासीदास संग्राहालय, घड़ी चौक रायपुर 0771-2537404 को शीघ्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
राज्य सम्मान के तहत आदिम जाति विभाग के अंतर्गत शहीद वीरनारायण सिंह, गुरू घासीदास, हाजी हसन अली तथा डॉ. भंवर सिंह पोर्ते सम्मान शामिल हैं। खेल-कूद विभाग के अंतर्गत गुण्डाधूर तथा महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव और महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत मिनीमाता सम्मान शामिल है। सहकारिता विभाग के अंतर्गत ठाकुर प्यारे लाल सिंह सम्मान, सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल, महाराजा अग्रसेन सम्मान तथा यति यतनलाल सम्मान और संस्कृति विभाग के अंतर्गत पंडित सुन्दरलाल शर्मा, चक्रधर सम्मान तथा दाऊमंदराजी सम्मान शामिल हैं।